Monday, November 3, 2014

।-----:"शायरी":-----।

दिल कुछ इस तरह से इतरा रहा है! 
कि जीने में सही कहूँ तो अब मजा आ रहा है!
-दिनेश करमनिया

न जाने किस कदर बीतेगी ये रात..
तेरा गम है, तेरी तन्हाई है और यादें भी हैं साथ!
-दिनेश करमनिया

मेरी रातों की राहत, दिन का इत्मीनान हो तुम,
जो छूटे तो दुआ, जो पा लूं तो खुदा हो तुम !
-दिनेश करमनिया

अै जिंदगी!
पलट उस पल को,
जिस घडी मेरा यार
मेरी यादों में, डूबा हो!
-दिनेश करमनिया

यारों!
पूछते हैं कि कैसे हो?
हमने जवाब दिया,
यारों की दुआएँ साथ हैं अब तक..
तो जिंदों में शुमार है!
-दिनेश करमनिया

ज़मीन सख़्त है और आसमाँ दूर,
बसर हो सके तो बसर कीजिए हुज़ूर!

जिंदा हूं पर जिंदगी से दूर हूं मैं
आज क्यूं इस कदर मजबूर हूं मैं 
बिना जुर्म के ही सजा मिलती है मुझे 
किससे कहूं आखिर बेकसूर हूं मैं..!

कोई तन्हा कैसे जिए, तुम्हें देख लेने के बाद,
दर्द आँखों का फन्हा हो, तुम्हें देख लेने के बाद!
-दिनेश करमनिया

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ।
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ।

हुज़ुर आपका भी एहतराम करता चलूँ
इधर से गुजरा, सोचा सलाम करता चलूँ

फिर चली मस्त हवा, और धुआँ उठने लगा,
इश्क ने दी बढा, और दिल जलने लगा!
-दिनेश करमनिया!

कौन कहता है तुझे हिसाब नहीं आता,
इस दिल से पूछ जो कर्जदार है तेरा!
-दिनेश करमनिया

रातों को ख्यालों में मैं भी और तुम भी,
और सुबह तन्हाई में मैं भी और तुम भी!
-दिनेश करमनिया

मुद्दत से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ ,
माना कि तुम्हें प्यार नहीं ,नफरत ही जताने आ जाओ !
-शायर यार

जख्म-ए-जिगर को मैंने क्या खूब कुरेदा है ,
अब तक टपक रहा है तेरा नाम लहू के साथ!
-शायर यार

कुछ कलमे..
कुछ नगमें..
तेरे थे.. अब मेरी डायरी में,
किसी काम के नहीं!
-दिनेश करमनिया

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